Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.302.22: इनमें जो मूल प्रकृति निराकार से साकार रूप में प्रकट होती है, उसे विद्यासर्ग कहते हैं और जो महत्ता और अहंकार है, उसे अविद्यासर्ग कहते हैं ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इनमें जो मूल प्रकृति निराकार से साकार रूप में प्रकट होती है, उसे विद्यासर्ग कहते हैं और जो महत्ता और अहंकार है, उसे अविद्यासर्ग कहते हैं ॥22॥
Among these, the basic nature which manifests from formless to corporeal form is called Vidyasarga and the importance and ego is called Avidyasarga. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥