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mahabharat 12.302.21: हिरण्यगर्भ विकार से युक्त ये महान भगवान् स्वयं अहंकार और उसके अभिमानी रचयिता विराट को उत्पन्न करते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.302.21 
एष वै विक्रियापन्न: सृजत्यात्मानमात्मना।
अहङ्कारं महातेजा: प्रजापतिमहंकृतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यगर्भ विकार से युक्त ये महान भगवान् स्वयं अहंकार और उसके अभिमानी रचयिता विराट को उत्पन्न करते हैं ॥21॥
 
This great God, who is blessed with Hiranyagarbha disorder, himself creates ego and its arrogant creator Virat. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)