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mahabharat 12.302.2: शत्रुसूदन! महाबाहु! कुरुनन्दन! अक्षरों और वर्णों का स्वरूप स्पष्ट रूप से समझने के लिए ही मैंने आपसे यह प्रश्न किया है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.302.2 
अक्षरक्षरयोर्व्यक्तिं पृच्छाम्यरिनिषूदन।
उपलब्धुं महाबाहो तत्त्वेन कुरुनन्दन॥ २॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! महाबाहु! कुरुनन्दन! अक्षरों और वर्णों का स्वरूप स्पष्ट रूप से समझने के लिए ही मैंने आपसे यह प्रश्न किया है। 2॥
 
Shatrusudan! Mahabahu! Kurunandan! I have asked you this question only to clearly understand the nature of letters and letters. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)