Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.302.14: देवताओं के बारह हज़ार वर्ष मिलकर एक चतुर्युग बनते हैं। इसे एक कल्प या महायुग समझो। ऐसे एक हज़ार महायुग ब्रह्माजी का एक दिन कहे गए हैं॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.302.14 
युगं द्वादशसाहस्रं कल्पं विद्धि चतुर्युगम्।
दशकल्पशतावृत्तमहस्तद् ब्राह्ममुच्यते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के बारह हज़ार वर्ष मिलकर एक चतुर्युग बनते हैं। इसे एक कल्प या महायुग समझो। ऐसे एक हज़ार महायुग ब्रह्माजी का एक दिन कहे गए हैं॥ 14॥
 
Twelve thousand years of the gods constitute one Chaturyuga. Consider this as a Kalpa or a Mahayuga. One thousand such Mahayugas are said to be one day of Lord Brahma.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)