Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.302.13: वसिष्ठजी बोले, "हे राजन! मैं तुमसे यह कह रहा हूँ कि यह संसार किस प्रकार नाशवान (परिवर्तनशील) होता है और उस अक्षर (अमर) के विषय में भी कह रहा हूँ, जिसका कभी नाश नहीं होता। सुनो।" | mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसिष्ठजी बोले, "हे राजन! मैं तुमसे यह कह रहा हूँ कि यह संसार किस प्रकार नाशवान (परिवर्तनशील) होता है और उस अक्षर (अमर) के विषय में भी कह रहा हूँ, जिसका कभी नाश नहीं होता। सुनो।"
Vasishtha said, "O King! I am telling you about the way in which this world decays (changes) and also about that Akshar (immortal) which is never destroyed. Listen." 13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥