Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.301.92-96: भरतनन्दन! धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर! परमेश्वर सात्त्विक, राजस और तामस गुणों को तथा बुद्धि, मन, आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी आदि सम्पूर्ण पदार्थों को अपने गुणों द्वारा व्याप्त करके समस्त क्षेत्रज्ञों (जीवों) में स्थित हैं, हे प्रभु! जैसे शिष्य अपने गुरु का अनुसरण करते हैं, वैसे ही मन, इन्द्रियाँ और शुभ-अशुभ कर्म भी उस आत्मा का अनुसरण करते हैं। जब आत्मा इन्द्रियों और प्रकृति से परे हो जाती है, तब वह नारायण रूप अविनाशी परमेश्वर को प्राप्त होती है, जो द्वन्द्व से रहित और मोह से परे है। 92-96॥ | mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतनन्दन! धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर! परमेश्वर सात्त्विक, राजस और तामस गुणों को तथा बुद्धि, मन, आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी आदि सम्पूर्ण पदार्थों को अपने गुणों द्वारा व्याप्त करके समस्त क्षेत्रज्ञों (जीवों) में स्थित हैं, हे प्रभु! जैसे शिष्य अपने गुरु का अनुसरण करते हैं, वैसे ही मन, इन्द्रियाँ और शुभ-अशुभ कर्म भी उस आत्मा का अनुसरण करते हैं। जब आत्मा इन्द्रियों और प्रकृति से परे हो जाती है, तब वह नारायण रूप अविनाशी परमेश्वर को प्राप्त होती है, जो द्वन्द्व से रहित और मोह से परे है। 92-96॥
Bharatnandan! Righteous King Yudhishthir! Supreme God, by pervading the Sattvik, Rajas and Tamas qualities and the complete qualities of intellect, mind, sky, air, light, water and earth and all other things through His qualities, is present in all the Kshetrajyas (souls), Lord! Just as disciples follow their Guru, similarly the mind, senses and good and bad deeds also follow that soul. When the soul transcends the senses and nature, then it attains the immortal God in the form of Narayana, who is free from conflict and beyond illusion. 92-96॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥