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mahabharat 12.301.90: फिर जब गहरी नींद की अवस्था होती है, तब विषय को जानने में असमर्थ होकर सारी इन्द्रियाँ अपने-अपने स्थान में उसी प्रकार लीन हो जाती हैं, जैसे विषहीन सर्प (भय से) छिपे रहते हैं। 90॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  12.301.90 
इन्द्रियाणीह सर्वाणि स्वे स्वे स्थाने यथाविधि।
अनीशत्वात् प्रलीयन्ते सर्पा हतविषा इव॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
फिर जब गहरी नींद की अवस्था होती है, तब विषय को जानने में असमर्थ होकर सारी इन्द्रियाँ अपने-अपने स्थान में उसी प्रकार लीन हो जाती हैं, जैसे विषहीन सर्प (भय से) छिपे रहते हैं। 90॥
 
Then, when the state of deep sleep occurs, all the senses, incapable of knowing the subject, get absorbed in their respective places in the same way as non-venomous snakes remain hidden (from fear). 90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)