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mahabharat 12.301.55: काम, क्रोध, भय, निद्रा और श्वास-ये पाँच दोष सब प्राणियों के शरीर में देखे जाते हैं ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.301.55 
कामक्रोधौ भयं निद्रा पञ्चम: श्वास उच्यते।
एते दोषा: शरीरेषु दृश्यन्ते सर्वदेहिनाम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
काम, क्रोध, भय, निद्रा और श्वास-ये पाँच दोष सब प्राणियों के शरीर में देखे जाते हैं ॥ 55॥
 
Desire, anger, fear, sleep and breathing—these five defects are seen in the bodies of all beings. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)