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mahabharat 12.301.54: भीष्म बोले - हे प्रभु! शत्रुघ्न! कपिल सांख्य दर्शन के अनुसार उत्तम मार्ग को जानने वाले ज्ञानी पुरुष इस शरीर में पाँच दोष बताते हैं। मैं तुम्हें उनके विषय में बताता हूँ, सुनो॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.301.54 
भीष्म उवाच
पञ्च दोषान् प्रभो देहे प्रवदन्ति मनीषिण:।
मार्गज्ञा: कापिला: सांख्या: शृणु तानरिसूदन॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - हे प्रभु! शत्रुघ्न! कपिल सांख्य दर्शन के अनुसार उत्तम मार्ग को जानने वाले ज्ञानी पुरुष इस शरीर में पाँच दोष बताते हैं। मैं तुम्हें उनके विषय में बताता हूँ, सुनो॥ 54॥
 
Bhishma said - O Lord! Shatrughan! The wise men who know the best path following the Kapil Sankhya philosophy tell of five defects in this body. I will tell you about them, listen. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)