Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.301.49-50: संयोगों, युगों, पर्वतों और नदियों के क्षय को देखो। रंगों के क्षय को और क्षय के अन्त को बार-बार देखो। जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था के दुःखों को देखो॥ 49-50॥ | mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संयोगानां क्षयं दृष्ट्वा युगानां च विशेषत:।
क्षयं च दृष्ट्वा शैलानां क्षयं च सरितां तथा॥ ४९॥
वर्णानां च क्षयं दृष्ट्वा क्षयान्तं च पुन: पुन:।
जरामृत्युं तथा जन्म दृष्ट्वा दु:खानि चैव ह॥ ५०॥
अनुवाद
संयोगों, युगों, पर्वतों और नदियों के क्षय को देखो। रंगों के क्षय को और क्षय के अन्त को बार-बार देखो। जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था के दुःखों को देखो॥ 49-50॥
Look at the decay of conjunctions, of ages, of mountains and of rivers. Look at the decay of colours and the end of decay again and again. Look at the miseries of birth, death and old age.॥ 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥