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mahabharat 12.301.36-37: हे मनुष्यों के स्वामी! इस संसार में होने वाली भयंकर विपत्तियों, चन्द्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तारों का गिरना, तारों की गति में परिवर्तन तथा पति-पत्नी का दुःखदायी वियोग आदि को आप जान लें और अपने कल्याण के लिए उपाय करें। ॥ 36-37॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  12.301.36-37 
उपप्लवांस्तथा घोरान् शशिनस्तेजसस्तथा॥ ३६॥
ताराणां पतनं दृष्ट्वा नक्षत्राणां च पर्ययम्।
द्वन्द्वानां विप्रयोगं च विज्ञाय कृपणं नृप॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस संसार में होने वाली भयंकर विपत्तियों, चन्द्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तारों का गिरना, तारों की गति में परिवर्तन तथा पति-पत्नी का दुःखदायी वियोग आदि को आप जान लें और अपने कल्याण के लिए उपाय करें। ॥ 36-37॥
 
O lord of men! You should know about the things that take place in this world like severe calamities, lunar eclipse, solar eclipse, falling of stars, change in the movement of stars and painful separation of husband and wife, etc. and take measures for your own welfare. ॥ 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)