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mahabharat 12.301.27-28: प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान ये पाँच प्राण हैं। अधोगामी वायु छठी और ऊर्ध्वगामी वायु जिसे प्रवाह कहते हैं, सातवीं है। इन सात प्रकार की वायुओं में से प्रत्येक के सात और प्रकार हैं। इस प्रकार कुल उनचास वायु हैं। अनेक प्रजापति, अनेक ऋषि और अनेक उत्तम मोक्ष मार्ग हैं। इन सबका ज्ञान प्राप्त करना चाहिए॥27-28॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  12.301.27-28 
प्राणापानौ समानं च व्यानोदानौ च तत्त्वत:।
अधश्चैवानिलं ज्ञात्वा प्रवहं चानिलं पुन:॥ २७॥
सप्त वातांस्तथा ज्ञात्वा सप्तधा विहितान् पुन:।
प्रजापतीनृषींश्चैव मार्गांश्चैव बहून् वरान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान ये पाँच प्राण हैं। अधोगामी वायु छठी और ऊर्ध्वगामी वायु जिसे प्रवाह कहते हैं, सातवीं है। इन सात प्रकार की वायुओं में से प्रत्येक के सात और प्रकार हैं। इस प्रकार कुल उनचास वायु हैं। अनेक प्रजापति, अनेक ऋषि और अनेक उत्तम मोक्ष मार्ग हैं। इन सबका ज्ञान प्राप्त करना चाहिए॥27-28॥
 
Prana, Apana, Samana, Vyana and Udana are the five vital airs. The downward moving air is the sixth and the upward moving air called Pravaha is the seventh. These seven types of air have seven more types each. Thus there are forty-nine airs in total. There are many Prajapatis, many Rishis and many excellent paths to salvation. One should acquire knowledge of all these.॥27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)