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mahabharat 12.301.22-23: बुद्धि का आश्रय तमोगुण है, तमोगुण का आश्रय रजोगुण है और रजोगुण का आश्रय सत्त्वगुण है। सत्त्वगुण आत्मा के अधीन है। जीवात्मा को भगवान नारायण-देव के अधीन समझो। भगवान नारायण का आश्रय मोक्ष (परब्रह्म) है, किन्तु मोक्ष का कोई आश्रय नहीं है (वे अपनी महिमा में स्थित हैं)। 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  12.301.22-23 
बुद्धिं तमसि संसक्तां तमो रजसि संश्रितम्।
रज: सत्त्वे तथा सक्तं सत्त्वं सक्तं तथाऽऽत्मनि॥ २२॥
सक्तमात्मानमीशे च देवे नारायणे तथा।
देवं मोक्षे च संसक्तं मोक्षं सक्तं तु न क्वचित्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि का आश्रय तमोगुण है, तमोगुण का आश्रय रजोगुण है और रजोगुण का आश्रय सत्त्वगुण है। सत्त्वगुण आत्मा के अधीन है। जीवात्मा को भगवान नारायण-देव के अधीन समझो। भगवान नारायण का आश्रय मोक्ष (परब्रह्म) है, किन्तु मोक्ष का कोई आश्रय नहीं है (वे अपनी महिमा में स्थित हैं)। 22-23॥
 
The shelter of intellect is Tamoguna, the shelter of Tamoguna is Rajoguna and the shelter of Rajoguna is Sattvagun. Sattvaguna is dependent on the soul. Consider the living soul as dependent on Lord Narayan-Dev. The shelter of Lord Narayana is salvation (Parabrahm), but there is no shelter for salvation (He is established in his own glory). 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)