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mahabharat 12.301.20-21: गति का आधार विष्णु हैं, बल का आधार इन्द्र हैं, उदर का आधार अग्नि है और पृथ्वीदेवी का आधार जल है। जल का तेज, वायु का तेज, वायु का आकाश, आकाश का आश्रय महत्तत्त्व है, अर्थात् महत्तत्त्व का कार्य अहंकार है और अहंकार का आधार सम्पूर्ण बुद्धि है। 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  12.301.20-21 
विष्णुं क्रान्ते बले शक्रं कोष्ठे सक्तं तथानलम्।
अप्सु देवीं समासक्तामपस्तेजसि संश्रिता:॥ २०॥
तेजो वायौ तु संसक्तं वायुं नभसि चाश्रितम्।
नभो महति संयुक्तं महद् बुद्धौ च संश्रितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
गति का आधार विष्णु हैं, बल का आधार इन्द्र हैं, उदर का आधार अग्नि है और पृथ्वीदेवी का आधार जल है। जल का तेज, वायु का तेज, वायु का आकाश, आकाश का आश्रय महत्तत्त्व है, अर्थात् महत्तत्त्व का कार्य अहंकार है और अहंकार का आधार सम्पूर्ण बुद्धि है। 20-21॥
 
The basis of movement is Vishnu, the basis of Bala is Indra, the basis of Udara is Agni and the basis of Prithvidevi is water. The glory of water, the glory of air, the sky of air, the shelter of the sky, Mahatattva, that is, the function of Mahattattva is ego and the foundation of ego is the entire intellect. 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)