Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.301.113: राजन! जो इस सांख्य-ज्ञान में तत्पर रहते हैं, वे ही प्रधान ब्राह्मण हैं। अतः ऐसा कभी नहीं देखा गया कि उन्हें मृत्यु के पश्चात पशु-पक्षी आदि योनियों में जाना पड़े। वे कभी नरक की निम्न गतियों को प्राप्त नहीं होते और उन्हें पापियों के बीच नहीं रहना पड़ता ॥113॥ | mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषां न तिर्यग्गमनं हि दृष्टं
नार्वाग्गति: पापकृताधिवास:।
न वा प्रधाना अपि ते द्विजातयो
ये ज्ञानमेतन्नृपतेऽनुरक्ता:॥ ११३॥
अनुवाद
राजन! जो इस सांख्य-ज्ञान में तत्पर रहते हैं, वे ही प्रधान ब्राह्मण हैं। अतः ऐसा कभी नहीं देखा गया कि उन्हें मृत्यु के पश्चात पशु-पक्षी आदि योनियों में जाना पड़े। वे कभी नरक की निम्न गतियों को प्राप्त नहीं होते और उन्हें पापियों के बीच नहीं रहना पड़ता ॥113॥
King! Those who are devoted to this knowledge of Sankhya are the chief Brahmins. Hence, it has never been seen that they have to go to the form of animals, birds etc. after death. They never reach the lower states of hell and they do not have to live among the sinners. ॥ 113॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥