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mahabharat 12.301.111: कुन्तीकुमार! यदि साधना में किसी त्रुटि के कारण सांख्य का सम्यक् ज्ञान प्राप्त न भी हो, तो भी सांख्ययोग का साधक अवश्य ही देवलोक में जाता है और वहाँ सुखपूर्वक निवास करके देवताओं का राज्य प्राप्त करता है। तदनन्तर, पुण्य का क्षय होने पर, वे इस लोक में आकर पुनः साधन-प्रयत्न करने वाले ब्राह्मणों के घर में जन्म लेते हैं। 111॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  12.301.111 
विपर्यये तस्य हि पार्थ देवान्
गच्छन्ति सांख्या: सततं सुखेन।
तांश्चानुसंचार्य तत: कृतार्था:
पतन्ति विप्रेषु यतेषु भूय:॥ १११॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! यदि साधना में किसी त्रुटि के कारण सांख्य का सम्यक् ज्ञान प्राप्त न भी हो, तो भी सांख्ययोग का साधक अवश्य ही देवलोक में जाता है और वहाँ सुखपूर्वक निवास करके देवताओं का राज्य प्राप्त करता है। तदनन्तर, पुण्य का क्षय होने पर, वे इस लोक में आकर पुनः साधन-प्रयत्न करने वाले ब्राह्मणों के घर में जन्म लेते हैं। 111॥
 
Kuntikumar! Even if the correct knowledge of Sankhya is not attained due to some error in the practice, still the seeker of Sankhya Yoga definitely goes to the world of gods and lives happily ever after there and attains the lordship of the gods. Subsequently, after the loss of virtue, they come to this world and take birth again in the house of Brahmins who are striving for the means. 111॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)