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mahabharat 12.301.110: राजन! मन और इन्द्रियों का प्रत्यक्ष संयम, श्रेष्ठ बल, सूक्ष्म ज्ञान और फलस्वरूप सुख देने वाले सूक्ष्म तप, इन सबका वर्णन सांख्यशास्त्र में भली-भाँति किया गया है ॥110॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.301.110 
शमश्च दृष्ट: परमं बलं च
ज्ञानं च सूक्ष्मं च यथावदुक्तम्।
तपांसि सूक्ष्माणि सुखानि चैव
सांख्ये यथावद् विहितानि राजन्॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
राजन! मन और इन्द्रियों का प्रत्यक्ष संयम, श्रेष्ठ बल, सूक्ष्म ज्ञान और फलस्वरूप सुख देने वाले सूक्ष्म तप, इन सबका वर्णन सांख्यशास्त्र में भली-भाँति किया गया है ॥110॥
 
Rajan! The direct control of mind and senses, superior strength, subtle knowledge and the subtle penances which give happiness in result, all of them have been properly described in Sankhya Shastra. 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)