Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.301.106: कुन्तीनन्दन! यह प्रसिद्ध है कि यह सांख्यशास्त्र स्वयं उस निराकार परमेश्वर का ही स्वरूप है। भारतश्रेष्ठ! जो भी ज्ञान है, वह सब सांख्यशास्त्र की मान्यता का ही प्रतिपादन करता है। 106॥ | mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमूर्तेस्तस्य कौन्तेय सांख्यं मूर्तिरिति श्रुति:।
अभिज्ञानानि तस्याहुर्मतं हि भरतर्षभ॥ १०६॥
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! यह प्रसिद्ध है कि यह सांख्यशास्त्र स्वयं उस निराकार परमेश्वर का ही स्वरूप है। भारतश्रेष्ठ! जो भी ज्ञान है, वह सब सांख्यशास्त्र की मान्यता का ही प्रतिपादन करता है। 106॥
Kuntinandan! It is famous that this Sankhyashastra itself is the shape of that formless God. Bharatshrestha! All the knowledge that exists propounds the belief of statistics only. 106॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥