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mahabharat 12.301.104-105: सभी ब्राह्मण, देवता और शांति का अनुभव करने वाले मनुष्य उसी अनंत, अच्युत, ब्राह्मण-हितैषी और परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करते हैं। उनके गुणों का चिंतन करते हुए हम उनकी महिमा गाते हैं। योग में महान सिद्धि प्राप्त योगी और अपार ज्ञान वाले सांख्यवेत्ता पुरुष भी उनकी स्तुति गाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 104-105
 
 
श्लोक  12.301.104-105 
सर्वे विप्राश्च देवाश्च तथा शमविदो जना:।
ब्रह्मण्यं परमं देवमनन्तं परमच्युतम्॥ १०४॥
प्रार्थयन्तश्च तं विप्रा वदन्ति गुणबुद्धय:।
सम्यग्युक्तास्तथा योगा: सांख्याश्चामितदर्शना:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
सभी ब्राह्मण, देवता और शांति का अनुभव करने वाले मनुष्य उसी अनंत, अच्युत, ब्राह्मण-हितैषी और परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करते हैं। उनके गुणों का चिंतन करते हुए हम उनकी महिमा गाते हैं। योग में महान सिद्धि प्राप्त योगी और अपार ज्ञान वाले सांख्यवेत्ता पुरुष भी उनकी स्तुति गाते हैं।
 
All Brahmins, gods and people who experience peace pray to the same infinite, infallible, Brahmin-friendly and supreme God, the Supreme Soul. While thinking about his qualities, we sing his glory. Yogis who have achieved great success in Yoga and Sankhyaveta men with immense knowledge also sing his praises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)