Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.301.102: वह ब्रह्म आदि, मध्य और अन्त से रहित, द्वंद्वरहित, जगत् की उत्पत्ति का कारण, अनादि, नित्य और सनातन है, ऐसा ज्ञानी पुरुष कहते हैं ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  12.301.102 
अनादिमध्यनिधनं निर्द्वन्द्वं कर्तृ शाश्वतम्।
कूटस्थं चैव नित्यं च यद् वदन्ति मनीषिण:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्म आदि, मध्य और अन्त से रहित, द्वंद्वरहित, जगत् की उत्पत्ति का कारण, अनादि, नित्य और सनातन है, ऐसा ज्ञानी पुरुष कहते हैं ॥102॥
 
That Brahma is without beginning, middle and end, without conflict, the cause of the origin of the world, eternal, eternal and eternal, this is what the wise men say. 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)