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mahabharat 12.301.101: सांख्य ज्ञान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस विषय में तुम्हें कोई संदेह नहीं करना चाहिए। यह नित्य, स्थायी और अपरिवर्तनशील ब्रह्म का प्रतिपादन करता है॥101॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  12.301.101 
अत्र ते संशयो मा भूज्ज्ञानं सांख्यं परं मतम्।
अक्षरं ध्रुवमेवोक्तं पूर्णं ब्रह्म सनातनम्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
सांख्य ज्ञान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस विषय में तुम्हें कोई संदेह नहीं करना चाहिए। यह नित्य, स्थायी और अपरिवर्तनशील ब्रह्म का प्रतिपादन करता है॥101॥
 
Sankhya knowledge is considered to be the best. You should not have any doubt in this matter. It propounds the eternal, permanent and immutable Brahman.॥101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)