Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.300.9: बाह्य और आन्तरिक पवित्रता, तप, प्राणियों पर दया और व्रत आदि नियम दोनों धर्मों में समान रूप से स्वीकार किए गए हैं। केवल उनके दर्शन अर्थात् उनकी पद्धतियाँ समान नहीं हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.300.9 
तुल्यं शौचं तपोयुक्तं दया भूतेषु चानघ।
व्रतानां धारणं तुल्यं दर्शनं न समं तयो:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बाह्य और आन्तरिक पवित्रता, तप, प्राणियों पर दया और व्रत आदि नियम दोनों धर्मों में समान रूप से स्वीकार किए गए हैं। केवल उनके दर्शन अर्थात् उनकी पद्धतियाँ समान नहीं हैं॥9॥
 
Rules like external and internal purity, penance, mercy towards living beings and following fasts etc. have been accepted equally in both the religions. Only their philosophies i.e. their methods are not similar.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)