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mahabharat 12.300.8: हे मनुष्यों के स्वामी! इन दोनों ही मतों को महापुरुषों ने आदर दिया है। यदि कोई इन दोनों मतों को जान ले और शास्त्रानुसार इनका आचरण करे, तो ये उसे परम मोक्ष की प्राप्ति करा सकते हैं। 8.   |   mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.300.8 
उभे चैते मते ज्ञाते नृपते शिष्टसम्मते।
अनुष्ठिते यथाशास्त्रं नयेतां परमां गतिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इन दोनों ही मतों को महापुरुषों ने आदर दिया है। यदि कोई इन दोनों मतों को जान ले और शास्त्रानुसार इनका आचरण करे, तो ये उसे परम मोक्ष की प्राप्ति करा सकते हैं। 8.
 
O lord of men! Both these schools of thought have been respected by great men. If one knows both these schools of thought and practices them according to the scriptures, then they can help one attain the ultimate salvation. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)