Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.300.55: तात! नरेश्वर! जैसे नाविक के बिना नाव समुद्र पार नहीं करा सकती, उसी प्रकार यदि योग के सिद्धान्त सिद्ध न हों, तो मनुष्य शुभ फल प्राप्त नहीं कर सकता ॥55॥ | mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विपन्ना धारणास्तात नयन्ति न शुभां गतिम्।
नेतृहीना यथा नाव: पुरुषानर्णवे नृप॥ ५५॥
अनुवाद
तात! नरेश्वर! जैसे नाविक के बिना नाव समुद्र पार नहीं करा सकती, उसी प्रकार यदि योग के सिद्धान्त सिद्ध न हों, तो मनुष्य शुभ फल प्राप्त नहीं कर सकता ॥55॥
Tat! Nareshwar! Just as a boat without a sailor cannot help people cross the sea, in the same way, if the concepts of Yoga are not proved then they cannot achieve auspiciousness. 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥