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mahabharat 12.300.43: भीष्म बोले, 'भारत! जो योगी चावल और तिल की भूसी खाता है तथा घी और तेल का त्याग करता है, वही योगबल प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.300.43 
भीष्म उवाच
कणानां भक्षणे युक्त: पिण्याकस्य च भारत।
स्नेहानां वर्जने युक्तो योगी बलमवाप्नुयात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'भारत! जो योगी चावल और तिल की भूसी खाता है तथा घी और तेल का त्याग करता है, वही योगबल प्राप्त करता है।
 
Bhishma said, 'Bharata! Only that Yogi who eats the husk of rice and sesame seed and who renounces ghee and oil, attains the power of yoga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)