श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.300.42 
युधिष्ठिर उवाच
आहारान् कीदृशान् कृत्वा कानि जित्वा च भारत।
योगी बलमवाप्नोति तद् भवान् वक्तुमर्हसि॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे भरतपुत्र! कृपया मुझे यह बताइए कि योगी किस प्रकार का आहार ग्रहण करता है और किसको हराकर योगसिद्धि प्राप्त करता है॥ 42॥
 
Yudhishthira asked - O son of Bharat! Kindly tell me what kind of food a yogi takes and whom he defeats to attain yogic powers.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)