श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.300.30 
आत्मनश्च समाधाने धारणां प्रति वा विभो।
निदर्शनानि सूक्ष्माणि शृणु मे भरतर्षभ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! भरतश्रेष्ठ! सुनो, मैं तुम्हें आत्म-समाधि के लिए किए जाने वाले ध्यान के कुछ सूक्ष्म उदाहरण बताता हूँ॥30॥
 
Lord! Bharatshrestha! Listen, let me tell you some subtle examples regarding the meditation that is done for self-samadhi. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)