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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन
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श्लोक 28
श्लोक
12.300.28
बलस्थस्य हि योगस्य बन्धनेशस्य पार्थिव।
विमोक्षप्रभविष्णुत्वमुपपन्नमसंशयम्॥ २८॥
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! शक्तिशाली योगी बंधनों को तोड़ने में समर्थ होता है; उसे स्वयं को मुक्त करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त हो जाती है, इसमें कोई संदेह नहीं है।
Prithvinath! A powerful Yogi is capable of breaking the shackles; he gets the complete power to free himself, there is no doubt about it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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