Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.300.27: हे प्रिये! उन शरीरों से वह भोगों का भोग करता है और घोर तप भी करता है। तत्पश्चात् जैसे सूर्य अपनी तेजस्विता को समेट लेता है, वैसे ही वह समस्त रूपों को अपने में समाहित कर लेता है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रिये! उन शरीरों से वह भोगों का भोग करता है और घोर तप भी करता है। तत्पश्चात् जैसे सूर्य अपनी तेजस्विता को समेट लेता है, वैसे ही वह समस्त रूपों को अपने में समाहित कर लेता है॥ 27॥
O dear! With those bodies he enjoys the objects of pleasure and also performs severe penance. Thereafter like the Sun which gathers its radiant rays, he absorbs all the forms into himself.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥