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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन
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श्लोक 26
श्लोक
12.300.26
आत्मनां च सहस्राणि बहूनि भरतर्षभ।
योग: कुर्याद् बलं प्राप्य तैश्च सर्वैर्महीं चरेत्॥ २६॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! योगबल से योगी हजारों योनियाँ बनाकर उन सबमें से होकर पृथ्वी पर विचरण कर सकता है॥ 26॥
O best of the Bharatas! By gaining the power of yoga a yogi can create thousands of forms and travel on the Earth through all of them.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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