श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.300.22 
दुर्बलश्च यथा राजन् स्रोतसा ह्रियते नर:।
बलहीनस्तथा योगो विषयैर्ह्रियतेऽवश:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राजा ! जैसे दुर्बल मनुष्य जल के वेग से बह जाता है, वैसे ही दुर्बल योगी भी असहाय होकर सांसारिक भोगों की ओर खिंचा चला जाता है ॥22॥
 
King! Just as a weak man is swept away by the force of water, similarly a weak yogi is helplessly drawn towards worldly pleasures. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)