यथा च शकुना: सूक्ष्मं प्राप्य जालमरिंदम।
तत्र सक्ता विपद्यन्ते मुच्यन्ते च बलान्विता:॥ १७॥
कर्मजैर्बन्धनैर्बद्धास्तद्वद् योगा: परंतप।
अबला वै विनश्यन्ति मुच्यन्ते च बलान्विता:॥ १८॥
अनुवाद
शत्रुनाशक! जैसे दुर्बल पक्षी सूक्ष्म जाल में फँसकर अपने प्राण खो देते हैं और बलवान पक्षी जाल को तोड़कर उसके बंधन से मुक्त हो जाते हैं, वैसे ही कर्म के बंधनों से बंधे हुए दुर्बल योगीजन पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं, किन्तु परंतप! योगबल से संपन्न योगीजन सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं।
Enemy-destroyer! Just as weak birds lose their lives after getting trapped in a subtle net, and strong birds break the net and become free from its bondage, similarly weak Yogis bound by the bondages of karma are completely destroyed, but Parantapa! Yogis endowed with the power of yoga get rid of all kinds of bondages.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥