श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.300.16 
बलहीनाश्च कौन्तेय यथा जालं गता झषा:।
वधं गच्छन्ति राजेन्द्र योगास्तद्वत् सुदुर्बला:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र राजेन्द्र! जैसे दुर्बल मछलियाँ जाल में फँसकर मर जाती हैं, वैसे ही योगबल से सर्वथा रहित पुरुषों की भी यही दशा होती है ॥16॥
 
O son of Kunti, Rajendra! Just as weak fish get entangled in the net and get killed, the same happens to men who are completely devoid of the power of yoga. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)