श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.300.1 
युधिष्ठिर उवाच
सांख्ये योगे च मे तात विशेषं वक्तुमर्हसि।
तव धर्मज्ञ सर्वं हि विदितं कुरुसत्तम॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! हे धर्म के ज्ञाता कुरुश्रेष्ठ! सांख्य और योग में क्या भेद है? कृपा करके मुझे यह बताइए; क्योंकि आप सब बातों के ज्ञाता हैं॥ 1॥
 
Yudhishthira asked - Father! O great Kurus, who is knowledgeable about Dharma! What is the difference between Sankhya and Yoga? Kindly tell me this; because you have knowledge of all things.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)