Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.30.8-9h: दोनों ने प्रसन्नतापूर्वक प्रेमपूर्वक यह शर्त रखी थी कि हमारे मन में जो भी अच्छे या बुरे विचार उत्पन्न हों, उन्हें एक-दूसरे से कह देना चाहिए, अन्यथा हमें मिथ्या शाप का दण्ड भोगना पड़ेगा। | mahabharat अध्याय 12.30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रीतिमन्तौ मुदा युक्तौ समयं चैव चक्रतु:।
यो भवेद्धृदि संकल्प: शुभो वा यदि वाशुभ:॥ ८॥
अन्योन्यस्य स आख्येयो मृषा शापोऽन्यथा भवेत् ।
अनुवाद
दोनों ने प्रसन्नतापूर्वक प्रेमपूर्वक यह शर्त रखी थी कि हमारे मन में जो भी अच्छे या बुरे विचार उत्पन्न हों, उन्हें एक-दूसरे से कह देना चाहिए, अन्यथा हमें मिथ्या शाप का दण्ड भोगना पड़ेगा।
Both of them had happily and lovingly made a condition that whatever good or bad intentions arise in our minds, we should tell each other about it; otherwise we will have to bear the brunt of the false curse. 8 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥