vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान
»
श्लोक 7
श्लोक
12.30.7
तावुभौ तपसोपेताववनीतलचारिणौ।
भुञ्जानौ मानुषान् भोगान् यथावत् पर्यधावताम्॥ ७॥
अनुवाद
दोनों तपस्वी पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे और सदैव की भाँति मानव-सुख भोगने लगे॥7॥
Both the ascetics began roaming around the Earth and enjoying human pleasures as usual. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×