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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान
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श्लोक 29-30h
श्लोक
12.30.29-30h
पर्वत: पृथिवीं कृत्स्नां विचचार महामति:॥ २९॥
पूज्यमानो यथान्यायं तेजसा स्वेन भारत।
अनुवाद
भारतवर्षमें परम बुद्धिमान पर्वत अपने तेजसे उचित सम्मान पाकर सम्पूर्ण पृथ्वीपर विचरण करने लगा । 29 1/2॥
India The most intelligent mountain started roaming all over the earth, getting due respect due to his brilliance. 29 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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