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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान
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श्लोक 2
श्लोक
12.30.2
यदा वर्षसहस्रायुस्तदा भवति मानव:।
कथमप्राप्तकौमार: सृंजयस्य सुतो मृत:॥ २॥
अनुवाद
जब उस समय मनुष्य की आयु एक हजार वर्ष होती थी, तब संजय का पुत्र किशोरावस्था प्राप्त करने से पहले ही क्यों मर गया?॥2॥
When the lifespan of a man in those days was a thousand years, then why did Sanjaya's son die before attaining the age of adolescence?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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