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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान
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श्लोक 10-11h
श्लोक
12.30.10-11h
आवां भवति वत्स्याव: कञ्चित् कालं हिताय ते॥ १०॥
यथावत् पृथिवीपाल आवयो: प्रगुणीभव।
अनुवाद
‘खुपाल! हम दोनों तुम्हारे हित के लिए कुछ समय तक तुम्हारे साथ रहेंगे। तुम हमारे साथ मिलजुलकर रहना।’॥10 1/2॥
‘Khupal! Both of us will stay with you for some time for your benefit. You should live in harmony with us.’॥ 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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