Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.3.30-31h: मूर्ख! ब्रह्मास्त्र के लोभ में तूने मुझसे झूठ बोलकर छल किया है। अतः जब तक तू युद्ध में अपने समान स्तर के किसी योद्धा से युद्ध न करे और तेरी मृत्यु का समय निकट न आ जाए, तब तक तू इस ब्रह्मास्त्र को सदैव स्मरण रखेगा। 30 1/2 | mahabharat अध्याय 12.3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्मान्मिथ्योपचरितो ह्यस्त्रलोभादिह त्वया।
तस्मादेतद्धि ते मूढ ब्रह्मास्त्रं प्रतिभास्यति॥ ३०॥
अन्यत्र वधकालात् ते सदृशेन समीयुष:।
अनुवाद
मूर्ख! ब्रह्मास्त्र के लोभ में तूने मुझसे झूठ बोलकर छल किया है। अतः जब तक तू युद्ध में अपने समान स्तर के किसी योद्धा से युद्ध न करे और तेरी मृत्यु का समय निकट न आ जाए, तब तक तू इस ब्रह्मास्त्र को सदैव स्मरण रखेगा। 30 1/2
'Fool! You have deceived me by telling me a lie due to your greed for the Brahmastra. Therefore, until you fight a warrior of your equal level in the war and the time of your death comes near, you will always remember this Brahmastra. 30 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥