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mahabharat 12.3.26-27: कर्ण परशुराम के श्राप से भयभीत था। अतः उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हुए उसने कहा, "भार्गव! आपको यह जानना चाहिए कि मैं ब्राह्मण और क्षत्रियों से भिन्न सूत जाति में उत्पन्न हुआ हूँ। संसार के लोग मुझे राधापुत्र कर्ण कहते हैं। ब्राह्मण! भृगुपुत्र! मैंने शस्त्रों के लोभ में ऐसा किया है! मुझ पर दया कीजिए।"   |   mahabharat अध्याय 12.3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  12.3.26-27 
तमुवाच तत: कर्ण: शापाद् भीत: प्रसादयन्।
ब्रह्मक्षत्रान्तरे जातं सूतं मां विद्धि भार्गव॥ २६॥
राधेय: कर्ण इति मां प्रवदन्ति जना भुवि।
प्रसादं कुरु मे ब्रह्मन्नस्त्रलुब्धस्य भार्गव॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण परशुराम के श्राप से भयभीत था। अतः उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हुए उसने कहा, "भार्गव! आपको यह जानना चाहिए कि मैं ब्राह्मण और क्षत्रियों से भिन्न सूत जाति में उत्पन्न हुआ हूँ। संसार के लोग मुझे राधापुत्र कर्ण कहते हैं। ब्राह्मण! भृगुपुत्र! मैंने शस्त्रों के लोभ में ऐसा किया है! मुझ पर दया कीजिए।"
 
Karna was afraid of Parshuram's curse. So, trying to please him, he said, 'Bhargava! You should know that I was born in the Suta caste, different from Brahmins and Kshatriyas. People of the world call me Radha's son Karna. Brahman! Bhrigu's son! I have done this due to the greed for weapons! Please have mercy on me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)