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mahabharat 12.3.25: हे मूर्ख! ब्राह्मण कभी इतना बड़ा दुःख सहन नहीं कर सकता। तेरा धैर्य क्षत्रिय के समान है। तू स्वेच्छा से मुझसे सच-सच कह, तू कौन है?॥25॥   |   mahabharat अध्याय 12.3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.3.25 
अतिदु:खमिदं मूढ न जातु ब्राह्मण: सहेत्।
क्षत्रियस्येव ते धैर्यं कामया सत्यमुच्यताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! ब्राह्मण कभी इतना बड़ा दुःख सहन नहीं कर सकता। तेरा धैर्य क्षत्रिय के समान है। तू स्वेच्छा से मुझसे सच-सच कह, तू कौन है?॥25॥
 
‘O fool! A Brahmin can never bear such a great sorrow. Your patience is like that of a Kshatriya. Tell me the truth voluntarily, who are you?’॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)