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mahabharat 12.3.23: वहाँ मुझे यह गति प्राप्त हुई, जहाँ मेरा कभी भी कल्याण नहीं हुआ था। हे साधु! आपके दर्शन से मैं इस पापमय योनि से बच गया हूँ।॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.3.23 
सोऽहमेनां गतिं प्राप्तो यथा न कुशलं तथा।
त्वया साधो समागम्य विमुक्त: पापयोनित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मुझे यह गति प्राप्त हुई, जहाँ मेरा कभी भी कल्याण नहीं हुआ था। हे साधु! आपके दर्शन से मैं इस पापमय योनि से बच गया हूँ।॥23॥
 
'It was there that I attained this state, where I never had a good life. O Sadhu! By meeting you, I have been saved from this sinful birth.'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)