Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.9: जब मुख से वचन रूपी बाण निकलते हैं, तो उनसे बिंधे हुए मनुष्य दिन-रात दुःख में डूबे रहते हैं; क्योंकि वे दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं, इसलिए विद्वान् पुरुष को चाहिए कि दूसरे व्यक्ति पर वचन रूपी बाण का प्रयोग न करे॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब मुख से वचन रूपी बाण निकलते हैं, तो उनसे बिंधे हुए मनुष्य दिन-रात दुःख में डूबे रहते हैं; क्योंकि वे दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं, इसलिए विद्वान् पुरुष को चाहिए कि दूसरे व्यक्ति पर वचन रूपी बाण का प्रयोग न करे॥9॥
When the arrows of words come out of the mouth, the person pierced by them remains immersed in sorrow day and night; because they hurt the feelings of others, therefore a learned person should not use the arrows of words on another person.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥