Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.8: किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचाएँ। दूसरों से कटु वचन न बोलें। नीच व्यक्ति से आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण न करें। ऐसे अशुभ वचन न बोलें जिनसे दूसरों को नरक जाना पड़े। ॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारुन्तुद: स्यान्न नृशंसवादी
न हीनत: परमभ्याददीत।
ययास्य वाचा पर उद्विजेत
न तां वदेद्रुषतीं पापलोक्याम्॥ ८॥
अनुवाद
किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचाएँ। दूसरों से कटु वचन न बोलें। नीच व्यक्ति से आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण न करें। ऐसे अशुभ वचन न बोलें जिनसे दूसरों को नरक जाना पड़े। ॥8॥
Do not hurt anyone's feelings. Do not speak unkind words to others. Do not accept spiritual teachings from a mean person. Do not utter inauspicious words that would send others to hell. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥