Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.44: हंस ने कहा - हे साधुगण! वेदों और शास्त्रों का अध्ययन ही ब्राह्मणों का दैवीय गुण है। उत्तम व्रतों का पालन करना उनका साधुत्व माना जाता है। दूसरों की निन्दा करना उनका असाधुत्व माना जाता है और मृत्यु को प्राप्त होना उनकी मनुष्यता मानी जाती है। | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हंस ने कहा - हे साधुगण! वेदों और शास्त्रों का अध्ययन ही ब्राह्मणों का दैवीय गुण है। उत्तम व्रतों का पालन करना उनका साधुत्व माना जाता है। दूसरों की निन्दा करना उनका असाधुत्व माना जाता है और मृत्यु को प्राप्त होना उनकी मनुष्यता मानी जाती है।
The swan said - O Sadhugan! The divinity of Brahmins is the study of Vedas and scriptures. Observing the best vows is considered their saintliness. Criticizing others is considered their non-saintliness and attaining death is considered their humanity. 44.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥