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mahabharat 12.299.4: उस समय साध्यगण बोले - हंस! हम साध्यगण हैं और आपसे मोक्ष धर्म के विषय में पूछना चाहते हैं, क्योंकि आप मोक्ष तत्त्व के ज्ञाता हैं, यह बात सर्वत्र विदित है॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.299.4 
साध्या ऊचु:
शकुने वयं स्म देवा वै साध्यास्त्वामनुयुङ्क्ष्महे।
पृच्छामस्त्वां मोक्षधर्मं भवांश्च किल मोक्षवित्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय साध्यगण बोले - हंस! हम साध्यगण हैं और आपसे मोक्ष धर्म के विषय में पूछना चाहते हैं, क्योंकि आप मोक्ष तत्त्व के ज्ञाता हैं, यह बात सर्वत्र विदित है॥4॥
 
At that time the Sadhyas said - Hans! We are the Sadhyas and we want to ask you about the religion of Moksha (liberation) because you are the knower of the principle of Moksha, this fact is known everywhere.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)