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mahabharat 12.299.39: साध्वी ने पूछा - हंस ! इस जगत् को किसने आच्छादित किया है ? इसका वास्तविक स्वरूप क्यों प्रकट नहीं होता ? मनुष्य अपने मित्रों का त्याग क्यों करता है ? और किस दोष के कारण वह स्वर्ग में नहीं जाता ?॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.299.39 
साध्या ऊचु:
केनायमावृतो लोक: केन वा न प्रकाशते।
केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्गं न गच्छति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
साध्वी ने पूछा - हंस ! इस जगत् को किसने आच्छादित किया है ? इसका वास्तविक स्वरूप क्यों प्रकट नहीं होता ? मनुष्य अपने मित्रों का त्याग क्यों करता है ? और किस दोष के कारण वह स्वर्ग में नहीं जाता ?॥ 39॥
 
Saadhy asked - Hans! Who has covered this universe? Why is its true nature not revealed? Why does a man abandon his friends? And due to which fault does he not go to heaven?॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)