Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.36: परंतु जो लोग सदैव वर्तमान इन्द्रियों के भोगों का भोग करने और पालन करने में लगे रहते हैं तथा जो चोरी करते हैं और सदैव कठोर वचन बोलते हैं, वे यदि तप आदि के द्वारा उक्त कर्मों के दोष से मुक्त भी हो जाएँ, तो भी देवता उन्हें पहचानकर दूर से ही त्याग देते हैं ॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परंतु जो लोग सदैव वर्तमान इन्द्रियों के भोगों का भोग करने और पालन करने में लगे रहते हैं तथा जो चोरी करते हैं और सदैव कठोर वचन बोलते हैं, वे यदि तप आदि के द्वारा उक्त कर्मों के दोष से मुक्त भी हो जाएँ, तो भी देवता उन्हें पहचानकर दूर से ही त्याग देते हैं ॥36॥
But those who are always engaged in feeding and enjoying the pleasures of the present senses and those who steal and always speak harsh words, even if they are freed from the guilt of the said deeds through penance etc., the gods recognize them and abandon them from a distance. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥