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mahabharat 12.299.33: जैसे कपड़ा जिस रंग में रंगा जाता है, उसी रंग का रूप धारण कर लेता है, वैसे ही यदि कोई मनुष्य सज्जन, दुष्ट, तपस्वी या चोर की संगति करता है, तो वह भी उनके जैसा हो जाता है, अर्थात् उनके रंग में रंग जाता है ॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.299.33 
यदि सन्तं सेवति यद्यसन्तं
तपस्विनं यदि वा स्तेनमेव।
वासो यथा रंगवशं प्रयाति
तथा स तेषां वशमभ्युपैति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जैसे कपड़ा जिस रंग में रंगा जाता है, उसी रंग का रूप धारण कर लेता है, वैसे ही यदि कोई मनुष्य सज्जन, दुष्ट, तपस्वी या चोर की संगति करता है, तो वह भी उनके जैसा हो जाता है, अर्थात् उनके रंग में रंग जाता है ॥ 33॥
 
Just like a cloth takes the form of the colour in which it is dyed, similarly if a person associates with a gentleman, a bad man, an ascetic or a thief, he becomes like them, that is, he gets colored by them. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)